हमारे बारे में

प्रस्तावना

सन् 1995 से पूर्व तक राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत थी। राज्य में समग्र रूप से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदाय करने के दृष्टिकोण से मध्य प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये राज्य शासन द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग की स्थापना वर्ष 1995 में की गई थी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के गठन के पश्चात् चिकित्सा शिक्षा के सभी क्षेत्रों में सतत् प्रगति हुई हैं तथा प्रदेश में निरंतर नए चिकित्सा महाविद्यालयों, दंत चिकित्सा महाविद्यालयों, नर्सिंग महाविद्यालयों तथा पैरामेडिकल महाविद्यालयों की स्थापना हुई है।

देश का 17 और मध्य प्रदेश राज्य का पहला चिकित्सा महाविद्यालय वर्ष 1946 में ग्वालियर में स्थापित हुआ था। तत्पष्चात वर्ष 1948 में चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर, वर्ष 1955 में चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल और चिकित्सा महाविद्यालय जबलपुर, वर्ष 1963 में चिकित्सा महाविद्यालय रीवा और वर्ष 2009 में चिकित्सा महाविद्यालय सागर की स्थापना हुई। सागर चिकित्सा महाविद्यालय प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में प्रारंभ किया गया। जो इस क्षेत्र में प्रदेश का पहला शासकीय स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय है। राज्य में पहला शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय सन् 1961 में इदौर में स्थापित किया गया था।

नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय

प्रदेश मे सात (विदिषा, दतिया, खण्डवा, रतलाम, शहडोल, शिवपुरी, छिंदवाड़ा) नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना प्रक्रियाधीन है। दतिया, खण्डवा, विदिशा, रतलाम, शहडोल में चिकित्सा महाविद्यालय के भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

निजी चिकित्सा महाविद्यालय

राज्य में निजी क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा को बढावा देने के लिए पीपुल्स कॉलेज आफ मेडिकल साईन्स एण्ड रिसर्च सेन्टर भानपुर भोपाल, श्री अरविन्दो इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साईन्स इन्दौर, आर. डी. गार्डी मेडिकल कालेज उज्जैन, इन्डेक्स मेडिकल कॉलेज इन्दौर, एल.एन. मेडिकल कॉलेज भोपाल, चिरायु मेडिकल कॉलेज भोपाल, आर.के.डी.एफ मेडिकल कॉलेज भोपाल, मार्डन मेडिकल कॉलेज, इंदौर, अमलतास मेडिकल कॉलेज, देवास, सुखसागर मेडिकल कॉलेज, जबलपुर एवं एडवांस मेडिकल कॉलेज, भोपाल स्थापित हुए। कृपया निजी कॉलेजों की नवीनतम संबद्धता के लिए एमसीआई वेबसाइट देखे।

स्वशासी संस्थाए

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों में होने वाले बदलावों को अपनाकर हम निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हो रहे हैं। वर्ष 1997 में मध्य प्रदेश शासन द्वारा चिकित्सा, दंत चिकित्सा एवं नर्सिंग महाविद्यालयों को स्वशासी संस्था घोषित कर स्वशासी समिति के माध्यम से चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों से संबंद्ध चिकित्सालयों का आधुनिकीकरण करते हुए आधुनिकतम तकनीक अपनाई जाकर, जन सामान्य को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का निरंतर उन्नयन किया जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान, दंत चिकित्सा एवं परिचारिका परिषद के मानदण्डो के अनुरूप इन संस्थाओं में निर्माण कार्य, आधुनिक उपकरणों की स्थापना की गई है तथा निरंतर आधुनिक किये जाने हेतु क्रय की प्रक्रिया प्रचलन मे है।

मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञानविश्‍वविद्यालय

म.प्र. आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय , जबलपुर की स्थापना म.प्र. विधानसभा द्वारा पारित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय अधिनियम 2011 (मध्य प्रदेश राजपत्र असाधारण में प्रकाशन दिनांक 06/05/2011) द्वारा की गई है। मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय का क्षेत्राधिकार सम्पूर्ण मध्य प्रदेश है। मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय की स्थापना चिकित्सा, दन्त, नर्सिंग, आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथी, योग, नेचरोपैथी, सिद्ध सह-चिकित्सा तथा अन्य सम्बद्ध विषयों में उपाधि ओर उपाधि पत्र स्तर पर व्यवस्थित, दक्षतापूर्ण एवं गुणात्मक शिक्षा सुनिष्चित करने के प्रयोजन के लिए चिकित्सा विज्ञान का एक विश्‍वविद्यालय स्थापित और निर्मित करने तथा उससे संबद्ध अन्य अनुषंगिक विषयों का उपबन्ध करने के लिए की गई है।

मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि का चयन कलेक्टर जबलपुर द्वारा किया जाकर भवन निर्माण करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय की स्थापना के पश्चात् प्रदेश मे संचालित चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल महाविद्यालयों द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं में एकरूपता आ जावेगी। इस विश्‍वविद्यालय के अंतर्गत मेडिकल, दंत चिकित्सा, नर्सिंग तथा पैरामेडिकल महाविद्यालयों की संबद्धता की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिससे इन सभी के स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्री एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में समानता हो जावेगी तथा आकादमिक सत्र सुचारू रूप से संचालित हो सकेंगे।

मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 में राशि रूपये 3125.00 लाख का प्रावधान विभागीय बजट में किया गया है (वेतन मद में राशि रूपये 125.00 लाख तथा निर्माण हेतु राशि रूपये 3000.00 लाख)।

मानव अंग प्रत्यारोपण

pमानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 के नियम 2014 के तहत प्रत्यारोपण को बढावा देने और संस्थाओं को पंजीकृत करने के लिए राज्य में संचालक चिकित्सा शिक्षा के साथ शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के अधिष्ठाताओं को भी समुचित प्राधिकारी बनाया गया है।